अतीत के झरोखे से

चाय
दो दोस्त
और पुरानी यादें ❤

-तुझे याद है वह जो तेरे पीछे पीछे फैकल्टी तक आयी थी!!
-कौन बे!
-वही जिसका नाम नहीं पूछा कभी तूने। 😒
-तू खुद भागेगा कि हम दौड़ाये।

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मेरी यादें ग़ज़ल का कोई मिसरा तो नहीं है ————————————–

फक़त चाहा तुझे है मैंने मांगा तो नहीं है
है तू मेरा मगर तू सिर्फ़ मेरा तो नहीं है

नहीं रिश्ता कोई बस चाहिए तेरी मुहब्बत
है इतनी सी मिरी ख़्वाहिश ज़ियादा तो नहीं है

सज़ा जिस जुर्म की हो हिज्र में जलना किसी के
ख़ता वो इश्क़ है तो हम मुबर्रा तो नहीं है

भुला कर वो मुझे खुश है जो लिखता था मुझी को
मेरी यादें ग़ज़ल का कोई मिसरा तो नहीं है

किसी को फ़र्क क्या पड़ता है मैं हूँ या नहीं हूँ
यूँ हो कर भी न होना मेरा होना तो नहीं है

उदासी ‘ख़्वाब’ की आँखें छुपाती भी कहाँ तक
इन आँखों से कोई भी राज़ छुपता तो नहीं है

Meaning of some Urdu words :-
*हिज्र – separation from beloved
*ख़ता – mistake
*मुबर्रा – exempted, guiltless, free (of)
*मिसरा – line of a Couplet of a Ghazal
*राज़ – secret

एक सफर था…

एक सफर था..गुज़र गया..!

तमाम नई ख्वाहिशें मिली…
रोज़ कई नुमाइशें मिली…
कई सारे हादसे मिले…
बिना रोशनी के रास्ते मिले..

एक सफर था…गुज़र गया..!

हम तो चलते चले गए…
ये ना सोचा कांटे भी थे…
सेज की तरह सजे हुए थे..
ये ना जाने वो अपने ही थे..

एक सफर था…गुज़र गया..!

पगडंडियां कुछ ऐसी बनी..
बारिश में घुलती चली गईं…
सूखे हुए पत्तों की तरह..
कहीं बिखरती सी चली गईं..

एक सफर था …गुज़र गया..!

शाम को दस्तकें आती थी..
अब दरवाजे से लौट गयीं…
सुबह की धूप भी खिलती थी.
वो कहीं किसी ओर छिप गयी..

एक सफर था…गुज़र गया..!

चलो,फिर से चलते है…
किसी ओर सफर पर…
खामोश हवा को देख कर..
नई कहानी बुन कर…
क्या पता तूफान ही आ जाये.
“सच”बोले तो सैलाब ही आ जाए..

एक सफर था..गुज़र गया…!

#बेजुबां_सा_प्यार…

 

वो एक ख़्याल जो लफ़्ज़ों में तब्दील ना हो सका….वो एक रात जिसकी कभी सहर ना हुई, वो एक बात जो दिल में ही दबी रह गयी…
वो एक सपनों का घरौंदा जो आंख खुलते ही टूट गया…वो एक फूल जो खिलने के पहले ही मुरझा गया, वो एक गुमनाम सिलसिला जो कभी आगे बढ़ा ही नहीं…

बातें, जो कभी हुई नहीं…दूरियां, जो कभी मिटी नहीं, ख़्वाब, जो कभी हक़ीक़त हुए नहीं…
बांहें, जिनमें तुमको भर ना सका मैं…हाथ तुम्हारा, जो कभी थाम ना सका मैं ,रातें, जो करवटों में गुज़र गयीं…दिन, जो उजड़े-उजड़े से बीते…शामें, जो तुम बिन गुज़री…
और एक छोटी सी ज़िन्दगी, जो वो लिखने में गुज़र गयी जिसे तुम कभी पढ़ोगी ही नहीं…या पढ़ भी लोगी तो समझोगी नहीं…और समझ भी गयी तो बताओ क्या इतना प्यार कर सकोगी..?

देखो.. इस एक तरफा प्यार में क्या कुछ नहीं था तुम बिन…तुम बिन क्या कुछ नहीं था वो छोड़ो, मगर प्यार तो था और रहेगा भी,गर याद रहे…

एक दर्द ऐसा भी

दर्द जो आपको सिर से पाव तक झकझोर देगा। ये दास्तान सुन कर शायद आपको तगड़ा झटका लगे लेकिन यह हकीकत है । और ये दर्द है BHU के आशिक़ों का ।आपको क्या लगा ? अच्छा जो भी सोच हो अपने सोचा है तो बढ़िया ही सोचा होगा तो खैर बात की बात ये है कि अब BHU में आशिक़ों का दर्द समझेगा कौंन?
तो दास्तां कुछ ऐसी है एक समय की बात है कि प्रेमी युगल बड़े मजे में भीम भैया की चाय

और प्रदीप भैया के कोल्ड काफी में खुश थे

कि तभी अचानक एक दिन CCD नामक बला का उदय हुआ।

जिसने सभी आशिको की नींद चैन सुकून सब कुछ एक झटके में छीन लिया। अब तो लड़कियों को भीम भैया की चाय गरम पानी और प्रदीप भैया की कोल्ड कॉफी में शुगर ज्यादा लगने लगा और वह अपने साजो सज्जा से अलंकृत और पउवा भर मेकअप वाले फेस पर एक कटीली मुस्कान के साथ *जानू CCD चलें* बस ये एक प्रहार बंदे की जेब पर भारी पड़ गया और बुझे हुए मन पर बनावटी मुस्कान से चलो जानू बोलकर निकल पड़ता है अपनी फटफटिया पर IIT की ओर । एक दिन हम भी सोचे कि आज चला जाए CCD जिसके बाहर मेला जैसा लगता है कुछ बहुते बढ़िया बनाता होगा तो हम भी पहुच गए टिप टॉप होके काहे की उ पउवा भर लिपस्टिक याद है न तो हम 100 ग्राम फेयर एंड लवली फ़ॉर मेन वाला शाहरुख भैया जिसका प्रचार करत रहेन। मर्दो की त्वचा रफ वाला तो हम भी पहुचे सेंट वेन्ट मार के शर्ट का किलिच बनाके वो जो बंदा मुसकुरा के पूछा क्या लेंगे सर तो 75 आइटम में केवल कॉफी समझ मे आया तो मंगा लिए। तत्पश्चात कॉफ़ी बड़े अदब के साथ परोशी गयी। उसपर दिल बना था उ तीर के साथ ,2 कौड़ी की कॉफी । इससे बढ़िया तो प्रदीप भैया हॉट कॉफी देते है। उसके बाद बिल काउंटर पर भीड़ देख के लग रहा था लंगर लगा है कार्ड के लिए अलग और कैश के लिए अलग हमारा बिल आया 110 रुपइया का हम बोले लाला एक्सपेरिमेंट तो 110 रुपइया का पड़ गया।
अभी CCD की मार से उबरा भी नही था कि अचानक आशिको पर नई बला आन पड़ी पेट्रोल के दाम। भैया पहिले पेट्रोल टंकी पर आशिक़ लोग 30 रुपैय्या का तेल लेते अब 50 के भी कम पड़ रहे। पूरा bhu घूमने में कम से कम 50 50 के दो बार डलवाना पड़ना है।

क्योंकि हमारे जैसे अखंड सिंगल आदमी को दिन भर 80 का तेल लग जाता है वो तो अच्छे भले कमिटेड है। इस बंदे ने बड़े चाव से 20 जनुअरी 2015 को बाइक (धन्नो) खरीदी की बंदिया घुमाएगा वो आज तक बंदों के साथ त्रिप्पलीग कर रहा ।नही नही 377 वाला मामला नही है।

*#एक अधूरा ख्वाब*

कभी तुमने अपने हंसते हुए चेहरे को ध्यान से देखा है, देखना कभी…हंसते हुए तुम बेहद खूबसूरत लगती हो…तुम्हारी एक हल्की सी मुस्कुराहट मेरे सपनों के इंद्रधनुष में रंग भर जाती है, तुम्हें हंसते हुए देखता हूं तो उनमें जान आ जाती है…हम तीनों मिल कर जी उठते हैं फिर से… तुम.. मैं और हमारे सपने…
कभी कभी तुम्हारी मुस्कुराहट को पेंट करने का दिल करता है, कांच सी पारदर्शी तुम्हारी बड़ी सी आंखें…उतना चमकदार रंग बना ही नहीं जो उन्हें कैनवस पे उतार सकें…कभी कभी सोचता हूं तुम्हारी रूह को एक काला टीका लगा दूं… कहां बची हैं अब इतनी पवित्र सी रूहें धरती पर… कहां रह गये हैं इतने साफ़ दिल इंसान…

सुनों, मैं बूढ़ा होना चाहता हूं तुम्हारे साथ, तुम्हें देखते हुए, तुमसे झगड़ते हुए, तुम्हें प्यार करते हुए… उम्र के उस पड़ाव पर जब घुटनों में दर्द रहा करेगा, तुम्हारे गले में बाहें डाल मैं थिरकना चाहता हूं तुम्हारी धड़कनों की मीठी सी धुन पे… मैं उड़ना चाहता हूं तुम्हारे साथ तुम्हारा हाथ पकड़ के एक पूरे चांद की रात में…तुम्हें पूरी दुनिया घूमाना चाहता हूं , वो सारी जगहें जिसके तुम ख्वाब देखा करती हो…जीवन के आखिरी दिनों में तुम्हें ले जाना चाहता हूं एक लांग ड्राइव पर, वो भी अपनी बाईक पर बिठा के और महसूस करना चाहता हूं हवा को अपने बूढ़े हो चले सफ़ेद बालों में…

मैं एक छोटा सा घर बनाना चाहता हूं, किसी पहाड़ी गांव में…

जहां हम दोनों बुड्ढे बुढिया मिल कर बागवानी करेंगे, जंगल से लकड़ी बिन के लायेंगे, चूल्हे में खाना बनायेंगे… कच्ची पक्की रोटियां सेंका करेंगे, प्रकृति की सुंदरता निहारेंगे… चिड़ियों को दाना खिलायेंगे और सारा दिन फ़ुर्सत से बैठ कर सिर्फ़ और सिर्फ बातें करेंगे…
खैर, मेरे ये सपने और गहराती ये काली रात उतनी ही खूबसूरत है जैसे की तुम्हारे माथे की वो छोटी सी काली बिंदी.(जो तुमने फैरवैल पर लगाई थी)..

बस तुम यूं ही मुस्कुराती रहना और मैं ऐसे ही अपने ख्वाब सजाता रहूंगा…हमेशा…!!

बेजुबां_सा_प्यार

वो एक ख़्याल जो लफ़्ज़ों में तब्दील ना हो सका….वो एक रात जिसकी कभी सहर ना हुई, वो एक बात जो दिल में ही दबी रह गयी…
वो एक सपनों का घरौंदा जो आंख खुलते ही टूट गया…वो एक फूल जो खिलने के पहले ही मुरझा गया, वो एक गुमनाम सिलसिला जो कभी आगे बढ़ा ही नहीं…

बातें, जो कभी हुई नहीं…दूरियां, जो कभी मिटी नहीं, ख़्वाब, जो कभी हक़ीक़त हुए नहीं…
बांहें, जिनमें तुमको भर ना सका मैं…हाथ तुम्हारा, जो कभी थाम ना सका मैं ,रातें, जो करवटों में गुज़र गयीं…दिन, जो उजड़े-उजड़े से बीते…शामें, जो तुम बिन गुज़री…

और एक छोटी सी ज़िन्दगी, जो वो लिखने में गुज़र गयी जिसे तुम कभी पढ़ोगी ही नहीं…या पढ़ भी लोगी तो समझोगी नहीं…और समझ भी गयी तो बताओ क्या इतना प्यार कर सकोगी..?

देखो.. इस एक तरफा प्यार में क्या कुछ नहीं था तुम बिन…तुम बिन क्या कुछ नहीं था वो छोड़ो, मगर प्यार तो था और रहेगा भी,गर याद रहे…

मेरी पहली मोहब्बत की आख़री दास्तान

#जब_वो_मुस्कुराती_है…

वो जब भी मुस्कुराती है, कितनी है वो मजबूत वो बयान कर जाती है…
उसे पसन्द है कई चीजें पर कुछ चीजें उसके दिल से जुड़ जाती है…
उसे पसंद है गाने सुनना,और बच्चों से बड़ा प्यार वो जताती है…
उसे खाना है बड़ा प्यारा,और ज्यादा बोल कर औरो को सताती है…
उसे सजना पसन्द नही है,वो बस रूह की खूबसूरती दिखाती है…
उसे पढ़ना पसन्द है,किताबें देखकर वो खुश हो जाती है…
बसता है उसका दिल बच्चों में,उन्हें देख खुद रोने लगे जाती है…
उसे पसन्द है बारिश ,और प्रकृति भी,वो देख शांति कही भी बस वही रम जाती है…
हालांकि उसे पसन्द है रात,पर रात की तन्हाई उसे रुलाती है…

वो दीवानी है ढलते सूरज की,और कही न कही दिल में उसे छुपाती है…
वो खुश हो बड़ी चीजों से मुमकिन नही,उसे छोटी चीजे अक्सर खुश कर जाती है…

उसके पास है गालों के भंवर, जिसमे मासूमियत समाती है..
वो कहने को रखती है बाल खुले,पर उन खुले बालो में कई दिल बांध जाती है…
वो लाडली है सब की घर में, वो सबके दिल में समाती है…
वो जज्बाती है बहुत,छोटी छोटी बातों पर रोने लग जाती है…
वो जब कुछ बोल ना पाये, तब वो अपनी मुस्कान से बोल जाती है…
हां..वो खूबसूरत सी एक लड़की है, जिसकी मुस्कुराहट मेरे दिल के तारों को छेड़ जाती है…!!

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